विशेषता | विवरण |
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नाम | बैराठ |
जिला | जयपुर |
नदी | बाणगंगा / अर्जुन की गंगा |
प्रमुख स्थल | बीजक पहाड़ी, भीमजी डूंगरी, महादेव डूंगरी, गणेश / मोती डूंगरी |
उत्खननकर्ता | दयाराम साहनी, कैलाशचन्द्र दीक्षित, नीलरत्न शास्त्री (1936-37) |
प्रागैतिहासिक कालीन अवशेष | पाषाणकालीन शैल चित्र, पाषाण औजार कारखाना, हाथी-मानव के शैल चित्र (प्राचीनकाल की चित्रशाला) |
महाभारतकालीन अवशेष | मत्स्य महाजनपद की राजधानी विराटनगर (बैराठ), पाण्डवों का अज्ञातवास स्थल |
मौर्य कालीन अवशेष | बौद्ध धर्म के अवशेष, सिंह उत्कीर्ण दो अशोक स्तम्भ, बौद्ध मंदिर (चैत्य), स्तूप व विहार |
अशोक अभिलेख | 1837 में कैप्टेन बर्ट द्वारा बीजक पहाड़ी से बैराठ/भाबू अभिलेख की खोज; 1870-71 में ए.एल. सी. कार्लाइल द्वारा भीमजी डूंगरी से दूसरा भाब्रू अभिलेख; अशोक के बौद्ध धर्मावलम्बी होने का प्रमाण |
बौद्ध स्तूप | हीनयान सम्प्रदाय का प्राचीनतम स्थापत्य, हूण आक्रमणकारी मिहिरकुल द्वारा नष्ट |
पुरातत्व सर्वेक्षण | राजस्थान में कार्लाइल की देखरेख में शुरू |
चीनी यात्री ह्वेनसांग | 634 ई. में यात्रा, आठ बौद्ध स्तूपों (मठ) की जानकारी |
मुगलकालीन अवशेष | अकबर की टकसाल, मुगल गार्डन, सराय व ईदगाह |
अन्य अवशेष | उत्तर गुप्तकालीन शंख लिपि, त्रिरत्नचक्र, बुद्ध के अस्थि अवशेष युक्त स्वर्ण मंजूषा (महाराजा सवाई रामसिंह के काल में प्राप्त), उत्तरी काले चमकीले मृदभांड |
मुद्राएँ | सुती कपड़े में 36 मुद्राएँ – 8 पंचमार्क (चाँदी), 28 इण्डोग्रीक (हिंद-युनानी); सर्वाधिक 16 सिक्के राजा मिनेण्डर के |