राजस्थान की जलवायु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सम जलवायु जिला | उदयपुर |
| दूसरा सबसे ठंडा स्थान | डबोक (उदयपुर) |
| भारतीय मौसम विभाग वेधशाला | जयपुर |
| जून माह में न्यूनतम वायुदाब | जैसलमेर |
| सम वर्षा रेखा | 50 सेंटीमीटर |
| राज्य की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक | 1. अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार 2. समुद्र तल से दूरी 3. अरावली पर्वतमाला की स्थिति 4. धरातलीय स्थिति 5. वनस्पति तत्व 6. मृदा की संरचना 7. समुद्र तल से ऊंचाई |
| अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार | राजस्थान का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंधीय जलवायु वाला क्षेत्र, बाकी क्षेत्र उपोष्ण कटिबंधीय |
| समुद्र तल से दूरी | राजस्थान आंतरिक भाग में स्थित होने के कारण समुद्री प्रभाव नहीं पड़ता |
| अरावली पर्वतमाला | राजस्थान में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है |
| धरातलीय स्थिति | राज्य की अधिकतर भूमि 370 मीटर से कम ऊंचाई पर स्थित है |
| वनस्पति तत्व | पश्चिमी क्षेत्र में न्यूनतम वनस्पति, जिससे जलवायु शुष्क |
| मृदा की संरचना | पश्चिमी भाग में रेतीली मिट्टी, पूर्वी और दक्षिणी भाग में चिकनी दोमट और काली मिट्टी |
| समुद्र तल से ऊंचाई | जितनी अधिक ऊंचाई, उतनी अधिक ठंडक |
| कोपेन जलवायु वर्गीकरण | 1. Aw (उष्णकटिबंधीय आद्र जलवायु) – डूंगरपुर और बांसवाड़ा 2. BSHW (अर्ध शुष्क प्रदेश) – चूरु, नागौर, सीकर, झुंझुनू, जोधपुर, बाड़मेर, पाली, सिरोही 3. Bwhw (शुष्क उष्ण मरुस्थलीय प्रदेश) – श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर का उत्तरी-पश्चिमी भाग 4. Cwg (उप आद्र प्रदेश) – अरावली के दक्षिणी-पूर्वी जिले |
| राजस्थान में स्थानीय हवाओं के नाम | भभूल्या – वायु भंवर पश्चिमी विक्षोभ – भूमध्यसागरीय पवनें, मावठ का कारण पुरवइया – ग्रीष्मकाल में पूर्वी दिशा से चलने वाली मानसूनी पवनें सिली – पौष माह में चलने वाली ठंडी पवनें तुवा – पश्चिमी राजस्थान की गर्म पवनें झाला – मृग मरीचिका आथूणी – शाम के समय चलने वाली पवनें अर्डाव – तेज शोर वाली पवनें |


