विधि |
विवरण |
खडीन |
- 15वीं शताब्दी में जैसलमेर में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा शुरू की गई।
- चारों ओर के क्षेत्र को ढालु बनाकर एक खड्डेनुमा भाग में वर्षा जल का संग्रहण।
- खड़ीन में जिस क्षेत्र से पानी बहकर आता है, उसे मदार घोषित किया जाता है।
- इसके पानी से की जाने वाली कृषि को खडीन कृषि कहा जाता है।
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तालाब |
वर्षा जल संरक्षण हेतु निर्मित संरचना। |
बावड़ी |
पुराने समय में शेखावाटी क्षेत्र में राजा-महाराजाओं द्वारा जल संरक्षण हेतु किया गया पक्का निर्माण। |
नाड़ी |
प्राकृतिक रूप से निर्मित गड्डेनुमा क्षेत्र जिसमें वर्षा जल एकत्र होता है। |
टोबा |
नाड़ी को कृत्रिम रूप से खोदकर अधिक गहरा किया गया क्षेत्र। |
बेरी |
किसी बड़े जलस्रोत या तालाब के चारों तरफ निर्मित छोटी-छोटी कुइयाँ जिन्हें ऊपर से ढका जाता है। |
झालरा |
- किसी बड़े जल स्रोत के निकट गड्डेनुमा क्षेत्र।
- सामूहिक स्नान या धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
- इसका जल पेयजल के रूप में प्रयोग में नहीं होता है।
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टांका / कुण्ड |
- कृत्रिम रूप से निर्मित भूमिगत जल का स्रोत।
- ऊपरी भाग ढका होता है तथा चारों तरफ ढालनुमा पायतन बनाया जाता है।
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अगोर |
- आँगन को ढालनुमा बनाया जाता है।
- एक छोटे गड्ढे में आँगन का पानी एकत्रित होता है।
- इस गड्ढे को पाड़ या पार कहा जाता है।
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