| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | गागरोण का किला |
| स्थान | झालावाड़ से 5 किमी. दूर, विंध्याचल पर्वतमाला पर |
| निर्माण | 7-8वीं सदी में डोड परमारों द्वारा, डोडगढ़ या धूलरगढ़ कहलाया |
| नाम परिवर्तन | महमूद खलजी प्रथम ने इसका नाम ‘मुस्तफाबाद’ रखा |
| निर्माण (परकोटा) | जालिमसिंह झाला ने विशाल परकोटे का निर्माण करवाया, जो जालिमकोट कहलाता है |
| विशेषता | बिना नींव के मुकंदरा पहाड़ी की सीधी चट्टानों पर खड़ा अनूठा किला |
| इतिहास | खींची चौहानों की राजधानी, देवनसिंह ने जीतकर नाम गागरोण रखा |
| यूनेस्को मान्यता | 21 जून, 2013 को विश्व विरासत स्थलों में शामिल |
| प्राकृतिक महत्व | आहू व कालीसिंध नदियों का संगम (सामेलणी स्थल) पास में |
| धार्मिक स्थल | मीठेशाह (संत हमीदुद्दीन चिश्ती) की दरगाह और पीपाजी (प्रतापराव) की समाधि |
| औरंगजेब का योगदान | ‘बुलंद दरवाजा’ का निर्माण |


