वाद्य यंत्र | विवरण | क्षेत्र/समुदाय | प्रसिद्ध कलाकार |
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कामायचा | • सारंगी जैसा आकार, तबली चौड़ी व गोल • 27 तार (बकरी की आँतों व घोड़े के बालों से) • 2 मोर व 9 मोरनियाँ • गूँजदार भारी ध्वनि |
जैसलमेर-बाड़मेर (माँगणियार समुदाय) |
साकर खान (पद्मश्री 2012) |
जन्तर | • वीणा जैसा दो तुम्बों वाला • बाँस की नली व 4 तार • गले में लटकाकर बजाया जाता है |
गुर्जर भोपे (देवनारायण फड़ वाचन) |
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रवाज | • सारंगी प्रकार • 12 तार (4 तांत, 8 तरब) • सन की डोरी वाला घट |
मेवाड़ क्षेत्र (राव व भाट) |
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भपंग | • तुम्बे व चमड़े से निर्मित • काँख में दबाकर बजाने की विधि • लकड़ी से प्रहार कर ध्वनि |
मेवात क्षेत्र | जहूर खाँ (अलवर) |
अपंग | • लकड़ी, धातु व चर्मपत्र से बना • संत इस्माइल नाथ जोगी द्वारा निर्मित • विशिष्ट वादन शैली |
उदयपुर संभाग (भील समुदाय) |
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