| विषय | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक | संत दादू दयाल जी (राजस्थान का कबीर) |
| जन्म | 1544 ई., अहमदाबाद (गुजरात) |
| गुरु | वृद्धानन्द |
| कर्मस्थली | करडाला (नागौर), आमेर और सांभर (जयपुर) |
| प्रधान पीठ | नारायणा गाँव (जयपुर) |
| स्थापना | 1574 ई. में पंथ की, 1602 ई. में प्रधान पीठ की स्थापना |
| मृत्यु | 1603 ई., नारायणा (इच्छा मृत्यु) |
| शाखाएँ | खालसा, विरक्त, उत्तरादे, खाकी, नागा |
| प्रमुख शिष्य | 152 शिष्य, जिनमें 52 ‘बावन स्तम्भ’ कहलाते हैं |
| संत रज्जब | सांगानेर निवासी, मुस्लिम पठान, खाकी शाखा प्रवर्तक, ग्रंथ – रज्जबवाणी, सर्वंगी |
| सुंदरदास | दौसा निवासी, खंडेलवाल वैश्य, नागा शाखा प्रवर्तक, राजा प्रतापसिंह की मदद की |


