**महाराजा गंगा सिंह (1880-1943)**
महाराजा गंगा सिंह बीकानेर रियासत के 21वें शासक थे। बीकानेर 23,317 वर्ग मील में फैला हुआ था, जो क्षेत्रफल के हिसाब से भारत की छठी सबसे बड़ी और राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी रियासत थी।
**प्रारंभिक जीवन और शिक्षा**:
सात वर्ष की आयु में गंगा सिंह गद्दी पर बैठे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर में पंडित राम चंद्र दूबे के मार्गदर्शन में हुई, फिर 1889-94 तक मेयो कॉलेज, अजमेर में और 1895-98 तक सर ब्रायन एगर्टन के तत्वावधान में। 1897 में लेफ्टिनेंट कर्नल जे. डी. बेल के अधीन देओली छावनी में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया।
**शासन और सुधार**:
1899 में 18 वर्ष की आयु में पूर्ण शासन शुरू किया। उस समय बीकानेर मध्ययुगीन स्थिति में था और राजस्व मात्र 2 लाख रुपये था। उन्होंने प्रशासन को पुनर्गठित किया, सचिवालय स्थापित किया, हिंदी को दरबारी भाषा बनाया, पुलिस और सेना को मजबूत किया। भूमि का निपटारा और मूल्यांकन किया। शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हुआ।
**प्रमुख उपलब्धि**:
1927 में गंग नहर परियोजना का पूरा होना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
**शिक्षा और समाज सेवा**:
महाराजा गंगा सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से निकटता से जुड़े थे। वे 1922-28 तक प्रो-चांसलर और 1929 से 1943 तक चांसलर रहे।
**सम्मान**:
– 1917: एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से ‘डॉक्टर ऑफ लॉज़’ की मानद उपाधि और ‘फ्रीडम ऑफ द सिटी ऑफ एडिनबर्ग’।
– 1917: ‘फ्रीडम ऑफ द सिटी ऑफ मैनचेस्टर’ और ‘फ्रीडम ऑफ द सिटी ऑफ लंदन’।
– 1919: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ‘डॉक्टर ऑफ सिविल लॉज़’ (मानद)।
– 1939: उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से ‘डॉक्टर ऑफ लॉज़’ (मानद)।
– 1937: पूर्ण जनरल की रैंक प्राप्त करने वाले एकमात्र भारतीय शासक।
**राष्ट्रीय योगदान**:
महाराजा गंगा सिंह ने भारतीय राष्ट्रवाद के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसने उन्हें महान भारतीय देशभक्तों में सम्मानित स्थान दिलाया।


