Sunday, March 8, 2026
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भारत का भूगोल: स्थिति, विस्तार और भौतिक प्रदेश

### भारत की स्थिति
भारत अक्षांशीय दृष्टि से उत्तरी गोलार्ध में स्थित है, जबकि देशांतरीय दृष्टि से यह पूर्वी गोलार्ध में अवस्थित है। वैश्विक संदर्भ में, भारत उत्तर-पूर्वी गोलार्ध का हिस्सा है।

#### अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार
– **अक्षांशीय विस्तार**: भारत 8°4′ उत्तरी अक्षांश से लेकर 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक फैला हुआ है।
– **देशांतरीय विस्तार**: यह 68°7′ पूर्वी देशांतर से 97°25′ पूर्वी देशांतर तक विस्तृत है।

#### भौगोलिक विस्तार
– **उत्तर से दक्षिण**: भारत का विस्तार जम्मू-कश्मीर में इंदिरा कॉल से लेकर तमिलनाडु में कन्याकुमारी तक है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 3,214 किलोमीटर है।
– **पूर्व से पश्चिम**: यह अरुणाचल प्रदेश के किबिथु से गुजरात के गोरमोता तक फैला है, जिसकी चौड़ाई लगभग 2,933 किलोमीटर है।
– **दक्षिणतम बिंदु**: भारत का सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट (जिसे पारसन पॉइंट या पिग्मेलियन पॉइंट भी कहते हैं) 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।

### सीमाएँ
भारत की कुल सीमा को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
1. **स्थलीय सीमा**: 15,200 किलोमीटर
2. **तटीय सीमा**: 7,516.6 किलोमीटर
– **मुख्य भूमि तट**: 6,100 किलोमीटर
– **द्वीपीय तट**: 1,416.6 किलोमीटर

#### पड़ोसी देशों के साथ सीमाएँ
1. **भारत-चीन सीमा (मैकमोहन रेखा)**: 3,488 किमी (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश)
2. **भारत-पाकिस्तान सीमा (रेडक्लिफ रेखा)**: 3,323 किमी (जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात)
3. **भारत-नेपाल सीमा**: 1,751 किमी (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम)
4. **भारत-भूटान सीमा**: 699 किमी (सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश)
5. **भारत-बांग्लादेश सीमा**: 4,096.7 किमी (पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम)
6. **भारत-अफगानिस्तान सीमा**: 108 किमी
7. **भारत-म्यांमार सीमा**: 1,643 किमी

### भारत का भौतिक स्वरूप
भारत की भौतिक संरचना को ऊंचाई-निचलेपन (उच्चावच) के आधार पर निम्नलिखित पांच प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है:
1. **उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र**: हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं से युक्त यह क्षेत्र देश के उत्तरी भाग में फैला है।
2. **विशाल उत्तरी मैदान**: गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित यह मैदानी क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है।
3. **प्रायद्वीपीय पठार**: दक्कन पठार सहित यह क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत का मुख्य हिस्सा है।
4. **थार का मरुस्थल**: पश्चिमी राजस्थान में स्थित यह शुष्क क्षेत्र भारत का एकमात्र बड़ा मरुस्थल है।
5. **तटीय मैदान और द्वीप समूह**: पूर्वी और पश्चिमी तटों के साथ-साथ अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीप समूह इस क्षेत्र में शामिल हैं।

### I उत्तरी पर्वतीय प्रदेश

यह क्षेत्र भारत के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसे तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है:
1. **ट्रांस हिमालय**
2. **हिमालय**
3. **पूर्वांचल की पहाड़ियाँ**

#### अ. ट्रांस हिमालय
यह क्षेत्र पूर्व से पश्चिम दिशा में विस्तृत है और इसमें चार प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ शामिल हैं, जो उत्तर से दक्षिण की ओर निम्नलिखित क्रम में हैं:
– **काराकोरम श्रृंखला**: इसे “एशिया की रीढ़” कहा जाता है। इसमें भारत की सबसे ऊँची चोटी **K2 (गॉडविन ऑस्टिन)** स्थित है, जिसकी ऊँचाई 8,611 मीटर है। इस श्रृंखला में **सियाचिन हिमनद** प्रमुख ग्लेशियर है, जो विश्व का सबसे लंबा गैर-ध्रुवीय हिमनद है। अन्य महत्वपूर्ण ग्लेशियरों में **बियाफो, बाल्टोरो, बाटुरा, और हिस्पार** शामिल हैं।
– **लद्दाख श्रृंखला**
– **जास्कर श्रृंखला**
– **कैलाश श्रृंखला**

**प्रमुख दर्रे**:
1. **काराताघला/काराकोरम दर्रा और अघिल दर्रा**: कश्मीर को मध्य एशिया से जोड़ते हैं।
2. **चांगला, लनकला, और इमिसला दर्रा**: कश्मीर को तिब्बत से जोड़ते हैं।
3. **खारदुंगला दर्रा**: लेह को नुब्रा घाटी से जोड़ता है। यह विश्व का सबसे ऊँचा मोटर वाहन योग्य दर्रा है। यहाँ दो कूबड़ वाले ऊँट (बैक्ट्रियन ऊँट) पाए जाते हैं।

**प्रमुख नदी**: इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नदी **सिंधु** है, जो तिब्बत में कैलाश पर्वत के पास मानसरोवर झील से निकलती है। यह लद्दाख और जास्कर श्रृंखलाओं के बीच बहती हुई पाकिस्तान में प्रवेश करती है। इसके दाहिने किनारे पर **श्योक और गिलगित** नदियाँ मिलती हैं।

#### ब. हिमालय
लगभग 7 करोड़ वर्ष पहले हिमालय के स्थान पर **टेथिस सागर** था। नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से यह सागर भर गया। इसके बाद भारत और एशिया के स्थलखंडों की टक्कर से यह अवसाद मुड़कर (वलन प्रक्रिया द्वारा) ऊपर उठा, जिससे **तृतीयक काल** में हिमालय की तीन समानांतर श्रृंखलाओं का निर्माण हुआ। यह श्रृंखलाएँ सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों के बीच 2,400 किलोमीटर लंबी चापाकार संरचना में फैली हैं। ये हैं:
1. **महान हिमालय**
2. **लघु हिमालय**
3. **शिवालिक हिमालय**

##### 1. महान हिमालय
यह श्रृंखला पश्चिम में **नंगा पर्वत** से पूर्व में **नामचा बरवा** तक फैली है, जिसकी औसत ऊँचाई 6,100 मीटर है।
**प्रमुख चोटियाँ**:
– **माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा)**: 8,848 मीटर, नेपाल में स्थित, विश्व की सबसे ऊँची चोटी।
– **कंचनजंगा**: 8,598 मीटर, सिक्किम में, भारत की सबसे ऊँची चोटी।
– **नंगा पर्वत**: 8,126 मीटर, जम्मू-कश्मीर।
– **नंदा देवी**: 7,817 मीटर, उत्तराखंड।
– **नामचा बरवा**: 7,756 मीटर, अरुणाचल प्रदेश।

**प्रमुख ग्लेशियर**:
– **गंगोत्री**: उत्तराखंड।
– **मिलम**: नेपाल।
– **यमुनोत्री**: सिक्किम।

**प्रमुख दर्रे**:
– **जम्मू-कश्मीर**:
– **बुर्जिल दर्रा**: श्रीनगर को गिलगित से जोड़ता है।
– **जोजिला दर्रा**: श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
– **पेंशिला दर्रा**: श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
– **हिमाचल प्रदेश**:
– **बारालाचा दर्रा**: लाहौल-स्पीति को लेह से जोड़ता है।
– **शिपकिला दर्रा**: शिमला को तिब्बत (कैलाश-मानसरोवर) से जोड़ता है। यहाँ से सतलज नदी भारत में प्रवेश करती है।
– **उत्तराखंड**:
– **थागाला, माना ला, नीति ला, लिपुलेख ला**: उत्तराखंड को कैलाश-मानसरोवर से जोड़ते हैं। **लिपुलेख ला** भारत, नेपाल, और चीन के त्रिकोण पर स्थित है।
– **मूलिंग ला**: उत्तराखंड के आंतरिक भागों को जोड़ता है।
– **सिक्किम**:
– **नाथुला दर्रा**: भारत-चीन के बीच प्राचीन रेशम मार्ग का हिस्सा, 1962 में बंद हुआ और 2006 में पुनः खुला।
– **जेलपला दर्रा**: सिक्किम को भूटान और चीन से जोड़ता है।
– **अरुणाचल प्रदेश**:
– **बुमला, बोमडिला, और यांगयाप दर्रा**: अरुणाचल को चीन से जोड़ते हैं। यांगयाप के पास से **ब्रह्मपुत्र** भारत में प्रवेश करती है।

##### 2. लघु हिमालय
यह महान हिमालय के दक्षिण में 3,000 से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर समानांतर रूप से फैली है। महान और लघु हिमालय के बीच सुंदर घास के मैदान हैं, जिन्हें कश्मीर में **मर्ग** (जैसे गुलमर्ग, सोनमर्ग) और उत्तराखंड में **बुग्याल** या **पयार** कहते हैं। कश्मीर घाटी में **प्लीस्टोसीन काल** (15-20 लाख वर्ष पूर्व) में करेवा झील थी, जो हिमनदों और नदियों के अवसाद से भरकर उपजाऊ घाटी में बदल गई। यहाँ **केशर, बादाम, और अखरोट** की खेती होती है।
**लघु हिमालय के स्थानीय नाम**:
– कश्मीर: **पीरपंजाल**
– हिमाचल: **धौलाधर**
– उत्तराखंड: **मसूरी और नागटिब्बा**
– नेपाल: **महाभारत**

**प्रमुख दर्रे**:
– **जम्मू-कश्मीर**:
– **पीरपंजाल दर्रा**: जम्मू को श्रीनगर से जोड़ने वाला पुराना मार्ग।
– **बनिहाल दर्रा**: पीरपंजाल में स्थित, जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है। यहाँ **जवाहर सुरंग** है। भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग **चेनानी-नाशरी** (9.2 किमी) 2017 में शुरू हुई।
– **हिमाचल प्रदेश**:
– **रोहतांग दर्रा**: कुल्लू-मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ता है। यहाँ से मनाली-लेह राजमार्ग गुजरता है।

##### 3. शिवालिक हिमालय
यह लघु हिमालय के दक्षिण में 1,500 मीटर की औसत ऊँचाई पर फैला है। इसे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
– जम्मू-कश्मीर: **जम्मू की पहाड़ियाँ**
– उत्तराखंड: **दून की पहाड़ियाँ**
– नेपाल: **चुरिया**
– अरुणाचल प्रदेश: **डाफला, मिरी, अबोर, मिशमी पहाड़ियाँ**
लघु हिमालय और शिवालिक के बीच संकीर्ण घाटियाँ हैं, जिन्हें पश्चिम में **दून** (जैसे देहरादून) और पूर्व में **द्वार** (जैसे हरिद्वार) कहते हैं।

#### स. पूर्वांचल की पहाड़ियाँ
यह उत्तर-पूर्वी भारत में विभिन्न राज्यों में फैली हैं और इन्हें स्थानीय नामों से जाना जाता है:
– **पटकाई बूम**: अरुणाचल प्रदेश
– **नागा पहाड़ियाँ**: नागालैंड
– **मणिपुर पहाड़ियाँ**: मणिपुर
– **मिज़ो/लुशाई पहाड़ियाँ**: मिज़ोरम
– **त्रिपुरा पहाड़ियाँ**: त्रिपुरा

**प्रमुख दर्रे**:
– **दीफू**: अरुणाचल को म्यांमार से जोड़ता है।
– **तुजु**: मणिपुर को म्यांमार से जोड़ता है।

### II मध्य का विशाल मैदान
हिमालय के उत्थान से इसके दक्षिण में एक खाई बनी, जो नदियों के अवसाद से भरकर समतल मैदान में बदल गई। यह **सिंधु, गंगा, और ब्रह्मपुत्र** नदी तंत्रों द्वारा निर्मित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 7.5 लाख वर्ग किलोमीटर, लंबाई 2,400 किलोमीटर, और औसत ऊँचाई 200-300 मीटर है। यह राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, और असम में फैला है। इसे चार भागों में बाँटा गया है:
1. **भाबर**: हिमालय के दक्षिण में मोटे कंकड़-पत्थरों का क्षेत्र, जहाँ नदियाँ भूमि में लुप्त हो जाती हैं।
2. **तराई**: भाबर के दक्षिण में नम क्षेत्र, जहाँ लुप्त नदियाँ पुनः प्रकट होती हैं। यहाँ मलेरिया का प्रकोप रहता है।
3. **खादर**: नदियों द्वारा बाढ़ में लाई गई नई मिट्टी वाला क्षेत्र।
4. **बांगर**: पुरानी जलोढ़ मिट्टी वाला क्षेत्र, जहाँ बाढ़ का पानी नहीं पहुँचता।

**विशेष स्थलाकृतियाँ**:
– **कंकड़**: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिट्टी के नीचे कैल्शियमी गांठें।
– **रेह/कल्लर**: शुष्क क्षेत्रों में मिट्टी की सतह पर लवण की सफेद परत।
– **भूड़**: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कठोर चट्टानी टीले।
– **चोश/चाओस**: पंजाब में हिमालय से आने वाली तेज़ जलधाराएँ।
– **धाया**: पश्चिमी पंजाब में नदी अपरदन से बने खड़े किनारे।
– **बेट**: पंजाब में बाढ़ग्रस्त खादर भूमि।
– **दोआब**: दो नदियों के बीच का क्षेत्र, जैसे बिस्त (व्यास-सतलज), बारी (व्यास-रावी), रेचना (रावी-चिनाब), चाज (चिनाब-झेलम), और सिंध सागर (सिंधु-झेलम)।
– **बील और चर**: पश्चिम बंगाल के डेल्टाई भाग में निचले जलभरे क्षेत्र (बील) और ऊपरी भाग (चर)।
– **राढ़ मैदान**: पश्चिम बंगाल का उत्तर-पूर्वी भाग।
– **माजुली द्वीप**: असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप।

### III प्रायद्वीपीय पठार
यह भारत का सबसे बड़ा (16.5 लाख वर्ग किलोमीटर) और सबसे पुराना (गोंडवाना लैंड का हिस्सा) भौतिक विभाग है। इसके चारों ओर **अरावली, विंध्याचल, सतपुड़ा, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट**, और उत्तर-पूर्व में **मेघालय पठार** हैं।
**प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ**:
– **अरावली**: राजस्थान।
– **विंध्याचल**: मध्य प्रदेश।
– **सतपुड़ा**: गुजरात और मध्य प्रदेश (ब्लॉक पर्वत, जिसके भ्रंश घाटियों में नर्मदा और ताप्ती बहती हैं)।
– **अजंता**: महाराष्ट्र।

**नदियाँ**:
– **नर्मदा**: विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच।
– **ताप्ती**: सतपुड़ा और अजंता के बीच।
– शेष नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा) दक्षिण-पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

**सतपुड़ा की श्रृंखलाएँ**:
– **राजपिपला**: गुजरात।
– **महादेव**: मध्य प्रदेश (सर्वोच्च चोटी **धूपगढ़**)。
– **मैकाल**: मध्य प्रदेश।

#### पश्चिमी घाट
महाराष्ट्र से केरल तक 1,600 किलोमीटर में फैला।
– **उत्तरी भाग**: **कलसोबाई** (महाराष्ट्र)।
– **मध्य भाग**: **कुद्रेमुख** (कर्नाटक)।
– **दक्षिणी भाग**: **अनैमुड़ी** (केरल, 2,695 मीटर, प्रायद्वीपीय पठार की सबसे ऊँची चोटी)।
– **नीलगिरी**: पश्चिमी और पूर्वी घाट के मिलन पर (सर्वोच्च चोटी **डोड्डाबेट्टा**, 2,637 मीटर, तमिलनाडु)। यहाँ **ऊटी** प्रसिद्ध है।
– **अन्नामलाई**: अनैमुड़ी यहाँ स्थित।
– **पालनी**: तमिलनाडु में **कोडाइकनाल** पर्यटन स्थल।

**प्रमुख दर्रे**:
– **थाल घाट**: मुंबई-नासिक।
– **भोर घाट**: मुंबई-पुणे।
– **पाल घाट**: कोच्चि-कोयंबटूर-चेन्नई।
– **सिनकोट**: तिरुवनंतपुरम-मदुरै।

#### पूर्वी घाट
नदियों के अपरदन से प्रभावित।
– **सर्वोच्च चोटी**: विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश)।
– **महेंद्रगिरी**: ओडिशा।
– ओडिशा में **गढ़जात पहाड़ियाँ**।

**पठार के उपविभाग**:
1. **मालवा**: मध्य प्रदेश।
2. **बुंदेलखंड और बघेलखंड**: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश।
3. **दक्कन पठार**: 5 लाख वर्ग किलोमीटर, काली मिट्टी (कपास के लिए उपयुक्त)।
4. **मैसूर पठार**: कर्नाटक (पश्चिमी भाग मलनाड, पूर्वी भाग मैदान)।
5. **रायलसीमा**: आंध्र प्रदेश।
6. **तेलंगाना**।
7. **दंडकारण्य**: छत्तीसगढ़ और ओडिशा।
8. **छोटा नागपुर**: पारसनाथ और राजमहल पहाड़ियाँ।
9. **मेघालय/शिलांग पठार**: गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियाँ।

### IV थार का मरुस्थल
यहाँ 50 सेमी से कम वर्षा होती है। यह राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चुरू, गंगानगर आदि जिलों में फैला है।
– **उत्पत्ति**: 700 वर्ष पहले यहाँ टेथिस सागर था, जिसके अवशेष खारी झीलों (सांभर, डीडवाना) के रूप में हैं।
– **जीवाश्म**: जैसलमेर में **आकल वुड फॉसिल पार्क** (जुरासिक काल, 18 करोड़ वर्ष पुराने वनस्पति जीवाश्म)।
– **भूमिगत जल**: चांदन और लाठी क्षेत्र (“थार का घड़ा”)।

**स्थलाकृतियाँ**:
– **तली/सर**: नीची भूमि।
– **टाट/रन**: वर्षा से बनी अस्थाई दलदली झीलें।
– **बालुका स्तूप**:
– **अनुदैर्ध्य**: पवन के समानांतर (सीफ)।
– **अनुप्रस्थ**: पवन के लंबवत (बरखान, पैराबोलिक)।
– **तारा स्तूप**: बहुभुजा।
– **नेबखा**: झाड़ियों के सहारे बने।

**जल निर्मित आकृतियाँ**:
– **बालासन**: पहाड़ियों से गिरा बेसिन।
– **पेडिमेंट**: ढाल पर जल कटाव।
– **बजादा**: कंकड़-पत्थरों का जमाव।
– **प्लाया**: समतल जल संग्रह क्षेत्र।

**उपविभाग**:
1. **पश्चिमी शुष्क रेतीला मैदान**: 25 सेमी वर्षा रेखा तक।
2. **अर्द्धशुष्क बांगर**:
– **घग्घर मैदान**: गंगानगर-हनुमानगढ़।
– **शेखावाटी**: सीकर, चुरू, झुंझुनू।
– **नागौरी उच्चभूमि**: खारी झीलें।
– **लूनी बेसिन**: जोधपुर, पाली, जालौर।

### V तटीय प्रदेश और द्वीप समूह
प्रायद्वीपीय पठार से समुद्र तट तक का क्षेत्र। 9 राज्य तटीय हैं:
– **पश्चिमी तट**: गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल।
– **पूर्वी तट**: पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

#### पश्चिमी तटीय मैदान
चौड़ाई 50-80 किमी।
– **काठियावाड़**: गुजरात।
– **कोकण**: महाराष्ट्र-गोवा।
– **कन्नड़**: कर्नाटक।
– **मालाबार**: केरल।

#### पूर्वी तटीय मैदान
चौड़ाई 160-480 किमी।
– **उत्तरी सरकार तट**: स्वर्णरेखा से गोदावरी-कृष्णा डेल्टा (उत्कल-ओडिशा, काकीनाड़ा-आंध्र)।
– **कोरोमंडल तट**: गोदावरी-कृष्णा से दक्षिण (कावेरी डेल्टा-तंजौर, “दक्षिण का अन्नभंडार”)।

**लैगून झीलें**:
– **चिल्का**: ओडिशा (सबसे बड़ी)।
– **पुलिकट**: आंध्र-तमिलनाडु।
– **वेम्बनाड, अष्टमुदी**: केरल (कयाल)।

**बंदरगाह**:
– पश्चिम: कांडला, मुंबई, न्हावाशेवा, मार्मागोवा, न्यू मंगलौर, कोच्चि।
– पूर्व: कोलकाता, हल्दिया, पारादीप, विशाखापट्टनम, एन्नोर, चेन्नई, तूतीकोरिन।

#### द्वीप समूह
भारत के 247 द्वीप हैं।
1. **अंडमान-निकोबार** (बंगाल की खाड़ी, 204 द्वीप):
– सबसे बड़ा: मध्य अंडमान।
– सर्वोच्च चोटी: सैडल पीक (732 मीटर, उत्तरी अंडमान)।
– **ज्वालामुखी**: बैरन (सक्रिय), नार्कोडम (प्रसुप्त)।
– **जलमार्ग**: 10° चैनल, डंकन पैसेज, कोको चैनल।
2. **लक्षद्वीप** (अरब सागर, 43 द्वीप):
– प्रवाल निर्मित।
– सबसे बड़ा: अंद्रोत।
– **जलमार्ग**: 8° और 9° चैनल।

**अन्य द्वीप**:
– **न्यू मूर** (डूब गया), **श्रीहरिकोटा** (उपग्रह केंद्र), **पंबन** (रामेश्वरम)।

 

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